पुणे: आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों के लिए TRTI कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन

जुलाई 10, 2026 - 09:43
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पुणे, 18 मई 2026

पुणे स्थित ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (TRTI) के मुख्य कार्यालय के सामने आज अनुसूचित जनजाति (ST) के नागरिकों के अधिकारों को लेकर एक विशाल और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया गया। इस आंदोलन का नेतृत्व सुशांत मोरे, लीगल एडवाइजर एडवोकेट त्रिनल टोनपे, एडवोकेट निकिता आनंदाचे और एडवोकेट सतीश मोघे ने संयुक्त रूप से किया।

📋 मुख्य मांगें और प्रशासनिक अड़चनें

​प्रदर्शनकारियों ने माननीय कमिश्नर को एक विस्तृत मांग पत्र (Representation) सौंपा, जिसमें मुख्य रूप से बालेघर गांव के निवासियों को आ रही समस्याओं को उठाया गया। आंदोलन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • जाति वैधता प्रमाणपत्र (Caste Validity Certificate) में देरी: बालेघर गांव में अनुसूचित जनजाति की एक बहुत बड़ी आबादी निवास करती है। इसके बावजूद, प्रशासनिक और तकनीकी खामियों के कारण स्थानीय लोगों को जाति वैधता प्रमाणपत्र प्राप्त करने में अत्यधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
  • विशेष अनुसंधान परियोजना (Special Research Project): ग्रामीणों की सामाजिक, आर्थिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करने के लिए संस्थान द्वारा एक विशेष रिसर्च प्रोजेक्ट शुरू किया जाए, ताकि उनकी पहचान और दावों को मजबूती मिल सके।
  • संवैधानिक प्रावधानों की गलत व्याख्या: नेताओं ने स्पष्ट किया कि ‘शेड्यूल एरिया’ (अधिसूचित क्षेत्र) और ‘शेड्यूल ट्राइब’ (अनुसूचित जनजाति) दो अलग-अलग संवैधानिक अवधारणाएं हैं। किसी गांव का तकनीकी रूप से शेड्यूल एरिया में न होना, वहां के मूल निवासी आदिवासियों के दावों को खारिज करने का आधार नहीं बन सकता।

⚖ संवैधानिक अधिकार और चेतावनी

अनुच्छेद 342 का संदर्भ:

एडवोकेट त्रिनल टोनपे ने कहा, “भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजातियों की पहचान राष्ट्रपति के आदेश से निर्धारित होती है। इसलिए, केवल ‘शेड्यूल एरिया’ का बहाना बनाकर बालेघर के आदिवासियों के सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों के अध्ययन से इनकार करना पूरी तरह से असंवैधानिक है। फैक्ट-फाइंडिंग और फील्ड स्टडी करना TRTI की मुख्य जिम्मेदारी है।”

हाईकोर्ट जाने की चेतावनी:

नेतृत्वकर्ताओं ने साफ किया कि सरकार का काम तकनीकी आधार पर आदिवासियों के हक को रोकना नहीं, बल्कि उनके प्रति संवेदनशील रुख अपनाना है। सुशांत मोरे ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर जल्द ही संतोषजनक और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे इस मामले को लेकर माननीय उच्च न्यायालय (High Court) में एक रिट याचिका (Writ Petition) दायर करेंगे।

🤝 प्रशासन का आश्वासन

​प्रदर्शन के बाद, TRTI के माननीय कमिश्नर ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे इस पूरे मामले पर सकारात्मक रूप से विचार करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे की कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा करने और जल्द ही उचित कदम उठाने का भरोसा दिया।

​इस अवसर पर सुधाकर सुसलाडी, आनंद घांट सहित बालेघर गांव के सैकड़ों नागरिक उपस्थित रहे। स्थानीय पुलिस प्रशासन के सहयोग के चलते पूरा आंदोलन बेहद शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से संपन्न हुआ।

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